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सीएम योगी ने ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ पुस्तक का किया विमोचन, बोले- दुनिया भारत से सीखे लोकतंत्र

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि भारत ने हमेशा सनातन संस्कृति और इतिहास से जुड़े प्रमाणों को प्रमुखता से रखा है। सीएम योगी ने ये बातें ‘प्रारंभिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि प्रो. देवेन्द्र हांडा की किताब ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ भारत की लोकतांत्रिक चेतना, ऐतिहासिक एकता और हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्‍तक वर्षों से किए जा रहे पश्चिमी दुष्प्रचार का तथ्यात्मक उत्तर देती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के बारे में यदि किसी को जानना है तो उसे भारत से सीखना होगा।

सीएम योगी ने कहा, हम इस बात को पूरी मजबूती के साथ कह सकते हैं कि महाभारत जिस भारत के बारे में कहता है कि भारत में जन्‍म लेना दुर्लभ लेना है, उसमें भी मनुष्‍य के रूप में जन्‍म लेना और दुर्लभ है। उसकी एक झलक हिंदुजा फाउंडेशन और प्रोफेसर देवेंद्र हांडा ने इस पुस्‍तक के माध्‍यम से प्रस्‍तुत की है।

उन्‍होंने आगे कहा, ‘यहां पर लगाई गई प्रदर्शनी उसकी एक झलक है। बहुत सारे लोगों को आपत्ति हो सकती है। इसके बहुत सारे कारण भी हैं। पश्चिमी विद्वानों ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि भारत एक इकाई नहीं थी। वह अपने आपको विद्वान कहते हैं लेकिन उन्‍होंने लगतार साजिशें और दुष्‍प्रचार किया। देश 1947 में इसका भुक्‍तभोगी बना था, जब भारत के दो अभिन्‍न हिस्‍से इससे अलग कर दिए गए थे। भारत के अंदर जो अंग्रेजों की साजिश थी कि भारत एक इकाई नहीं वे अलग-अलग भागों में इसको विभाजित करना चाहते थे। उनकी मंशा थी यह दिखाने की हम ही शासन कर सकते हैं, इनको शासन करना नहीं आता।’

योगी आदित्‍यनाथ का कहना था कि अंग्रेजों ने भारत को कमजोर करने के लिए जो साजिशें रचीं लेकिन उसका भी देश में जोरदार विरोध हुआ। याद करिए कि भारत कब एक नहीं था। जब भारतीय मनीषा इस बात का उद्घोष करती है कि उतर में जिसके हिमालय है, दक्षिण में जिसके समुद्र है उस देश का नाम भारत है। आप याद करिए कि यह जो श्‍लोक है यह ब्रिटिशर ने दिया है न इस्‍लाम ने दिया है। यह भारत की हजारों वर्षों की विरासत का प्रतीक है जो हिमालय से समुद्र तक फैले हुए भूभाग को भारतवर्ष के रूप में जानता है।’

अखंड भारत के बारे में उन्‍होंने कहा, यह भारतवर्ष जिसमें वर्तमान का भारत भी है, पाकिस्‍तान भी है, बांग्‍लादेश भी है। यह वृहत्तर भारत यही भारतीयों का देश है। इसकी संतति भारतीय कहलाती है। इस हजारों वर्षों की इस विरासत को लोग भूल गए इसलिए इस तरह की टिप्‍पण‍ियां करते हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन-2047 पंच प्रण और 11 संकल्पों के साथ हर भारतीय को जोड़ता है। इसका पहला प्रण ही विरासत पर गौरव की अनुभूति करना है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का पुनरोद्धार और सनातन धरोहरों का संरक्षण इसी विजन का साकार रूप है।

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