हैदराबाद के डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी (एएफए) से स्नातक होने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की महिलाओं के पहले बैच सहित कुल 231 फ्लाइट कैडेटों (194 पुरुष और 37 महिलाएं) ने 13 जून, 2026 को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 217वें कोर्स की संयुक्त स्नातक परेड की समीक्षा की और स्नातक कैडेटों को ‘राष्ट्रपति कमीशन’ प्रदान किया, जो भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के लिए कैडेटों के पूर्व-कमीशनिंग प्रशिक्षण की समाप्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के नौ (09) अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के तीन अधिकारियों और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के दो अधिकारियों को ‘विंग्स’ से सम्मानित किया गया। नौवहन प्रशिक्षण पूरा करने पर तीन अधिकारियों को ‘ब्रेवेट’ प्रदान किए गए। रक्षा मंत्री ने स्नातक कैडेटों को बधाई देते हुए कहा कि वे एक ऐसी सेवा में शामिल हो रहे हैं जिसने राष्ट्र के लिए ढाल और तलवार दोनों की भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “श्रीनगर एयरलिफ्ट के जरिए भारतीय वायु सेना ने 1947-48 के कश्मीर युद्ध का रुख बदल दिया और 1971 के युद्ध के दौरान निर्णायक हवाई हमलों से मात्र 13 दिनों में इतिहास रच दिया। 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी अदम्य भावना और अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन हुआ, जब उन्होंने आतंकी ठिकानों को स्पष्टता और सटीकता से नष्ट कर दिया। यह ऑपरेशन न केवल हमारे स्वदेशी विमानों द्वारा, बल्कि भारतीय वायु सेना के प्रशिक्षित, साहसी और अनुशासित अधिकारियों के कारण भी सफल रहा। मुझे विश्वास है कि यह भविष्य के अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।” श्री सिंह ने अधिकारियों से उभरती चुनौतियों के प्रति निरंतर सतर्क रहने और स्थिति के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाओं को समायोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “परंपरागत रूप से युद्ध में दो पहलू शामिल होते हैं: सैनिक और उनके साजो-सामान। हालांकि, आधुनिक युद्ध में न तो शत्रु दिखाई देता है और न ही इस्तेमाल किया जा रहा हथियार। रडार, उपग्रह, ड्रोन, सेंसर और रोबोटिक्स जैसी प्रणालियों के कारण लड़ाकू या उनके साजो-सामान का पता लगाना असंभव हो जाता है। ऐसे परिदृश्य भी हैं जहां शत्रुओं की यातायात प्रणालियों और यहां तक कि सीसीटीवी नेटवर्क को भी हैक करके नियंत्रित किया जा रहा है। आपके प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अभ्यासों ने आपको अनिश्चितताओं और अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार किया है। आपको हमेशा सतर्क रहना चाहिए।” रक्षा मंत्री ने कैडेटों को भविष्य की युद्ध प्रणालियों और रणनीतियों को समझने, अपनाने, आत्मसात करने और आवश्यकता पड़ने पर उनमें बदलाव करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी मोर्चों पर निर्णायक बढ़त हासिल करने के लिए नवाचार, क्रियान्वयन और प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “प्रत्येक संघर्ष सीखने का अवसर प्रदान करता है। आपको कड़ी मेहनत को बुद्धिमत्ता और प्रतिभा के साथ जोड़ना होगा। वर्तमान युग में, बुद्धिमान राष्ट्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना रहे हैं। पहले यह माना जाता था कि प्रमुख शक्तियों को हर मोर्चे पर निर्णायक बढ़त प्राप्त है, लेकिन आज अपेक्षाकृत छोटी शक्तियां भी छोटे लेकिन घातक हथियारों और नवीन रणनीतियों का उपयोग करके बड़े प्लेटफार्मों पर भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।” श्री सिंह ने अधिकारियों से निरंतर सीखने और प्रशिक्षण जारी रखने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि उनके कंधों पर लगे ‘पंख’ केवल एक बैज नहीं हैं, बल्कि हर भारतीय के भरोसे का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “आप जिस जिम्मेदारी को संभालने वाले हैं, वह इतनी जटिल है कि आपको अक्सर मिनटों में नहीं, बल्कि सेकंडों या उससे भी कम समय में निर्णय लेने होंगे। आपको निरंतर उच्च स्तर के पेशेवर मानकों और आचरण बनाए रखना होगा जो दूसरों को प्रेरित करे।” रक्षा मंत्री ने महिला अधिकारियों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि नारी शक्ति की बढ़ती उपस्थिति से भारतीय वायु सेना और अधिक मजबूत और संतुलित बनेगी। उन्होंने कहा, “यह हमारी समावेशी सेना की ताकत को दर्शाता है।” उन्होंने स्नातक वियतनामी कैडेटों को उनके भविष्य के प्रयासों में सफलता की शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि उनका प्रशिक्षण दोनों देशों के बीच मित्रता को और मजबूत करेगा। श्री सिंह ने देश और विदेश में कई बचाव अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में भारतीय वायु सेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की, जो राष्ट्रीयता, भाषा या सीमाओं से परे, पूरी मानवता की सहायता करने की भारतीय संस्कृति और लोकाचार को दर्शाता है। उन्होंने अपने समापन भाषण में कहा, “अक्सर कहा जाता है कि ‘आसमान ही सीमा है’। भारतीय वायु सेना के लिए यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन आपको ‘आसमान ही हमारा घर है’ की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। यही सोच हमें 2047 तक विकसित भारत बनाने में मदद करेगी।”
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