पटना की गलियों से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपना कारोबार साम्राज्य खड़ा करने वाले वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया। स्कीइंग दुर्घटना के बाद न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में अग्निवेश का इलाज चल रहा था। जहां बुधवार को अचानक आए कार्डियक अरेस्ट से उनका देहांत हो गया। अनिल अग्रवाल ने बेहद दुखद पोस्ट के साथ इसबारे में जानकारी साझा की। अपने पोस्ट में उन्होंने अपने बेटे अग्निवेश के साथ तमाम यादें साझा की है। इस बीच, लोग यह जानने में लगे हैं कि भारत के सबसे अमीर शख्सियतों में शुमार अनिल अग्रवाल के बेटे कौन थे। वे क्या करते थे। इसके अलावा, उनके परिवार में कौन कौन है? साथ ही अनिल अग्रवाल की संपत्ति कितनी है और बेटे के निधन के बाद इस कारोबार का मालिक कौन होगा?
अनिल अग्रवाल के परिवार में कौन-कौन?
गौरतलब है कि अनिल अग्रवाल की दो संतानें हैं। दिवंगत पुत्र अग्निवेश और पुत्री प्रिया अग्रवाल। अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में बोर्ड सदस्य थे। वहीं, प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं।साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। अनिल अग्रवाल मूल रूप से बिहार से आते हैं और राज्य के सबसे अमीर आदमी माने जाते हैं।
कौन थे अग्निवेश? (Who is Agnivesh Agarwal?)
अग्रवाल ने बताया कि अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से आने वाले अग्निवेश ने जीवन में खेल, संगीत और नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की, इसके बाद फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। अपने पेशेवर योगदान के साथ-साथ वे सरल, संवेदनशील और मानवीय स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
अग्निवेश की पत्नी कौन है? ( Agnivesh Agarwal Wife)
वेदांता ग्रुप के चैयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश की शादी पूजा बांगुर से हुई थी। पूजा बांगुर श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक हरि मोहन बंगुर की पुत्री हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो कारोबारी घराने के बच्चों की ये शादी उस जमाने की सबसे महंगी शादियों में शुमार हुई थी। पूजा ने अग्निवेश अग्रवाल से गोवा के फोर्ट अगुआडा रिसॉर्ट के एक निजी समुद्र तट पर शादी की थी। दोनों की शादी में मुंबई और कोलकाता से जेट एयरवेज के चार्टर्ड विमान से 600 से अधिक मेहमान आए थे।
पूजा अग्रवाल हेब्बर हैं बहन
अग्निवेश की बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं। उनकी शादी 2013 से बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी। उनकी एक बेटी माही है। पूजा वेदांता लिमिटेड में गैर-कार्यकारी निदेशक और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष हैं। वह अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की निदेशक भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। प्रिया वेदांता लिमिटेड में ईएसजी, निवेशक संबंध, कॉर्पोरेट संचार, मानव संसाधन, डिजिटल और सामाजिक प्रभाव विभागों का संचालन करती हैं।
पर्यावरण और सतत विकास के प्रति उनकी गहरी रुचि है और वेदांता लिमिटेड में ईएसजी परिवर्तन में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्बन उत्सर्जन कम करने, जल संरक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा, सामुदायिक कल्याण और कार्यबल विविधता पर केंद्रित कार्य योजनाओं के साथ, प्रिया के नेतृत्व में वेदांता लिमिटेड ईएसजी के क्षेत्र में उद्योग जगत की अग्रणी कंपनी बनने की दिशा में एक परिवर्तनकारी यात्रा पर अग्रसर है।
अग्निवेश अग्रवाल का करियर
अग्निवेश वेदांता समूह और उससे जुड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे हिंदुस्तान जिंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और 2019 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। इसके अलावा, उन्होंने वेदांता द्वारा समर्थित कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इतना ही नहीं उन्होंने यूएई में स्थित एक बहुमूल्य धातु शोधन कंपनी, फुजैराह गोल्ड एफजेडसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा वे ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और स्टेरलाइट डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज सहित समूह की अन्य सहायक कंपनियों में निदेशक पद संभाले।
कितनी है अग्निवेश अग्रवाल की संपत्ति
अग्निवेश अग्रवाल की कुल संपत्ति को लेकर कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। लेकिन जुलाई 2025 की फोर्ब्स सूची के मुताबिक उनके पिता अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति करीब 35,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसने उन्हें बिहार का सबसे धनी व्यक्ति बना दिया। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में उनका स्थान 16वां था, जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स में वे चौथे पायदान पर हैं।
कबाड़ से कॉपर, फिर ‘मेटल किंग’ बने अनिल अग्रवाल
1954 में पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल का बचपन साधारण मारवाड़ी परिवार में बीता। घर की आर्थिक चुनौतियों ने उन्हें जल्दी जिम्मेदार बना दिया और पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। महज 19 साल की उम्र में वे एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर के साथ मुंबई पहुंचे। अनिल का तब इकलौता लक्ष्य था, अपने दम पर पहचान बनाना। शुरुआती वर्षों में उन्होंने अलग-अलग कारोबार आजमाए, पर नौ प्रयासों में लगातार असफलता मिली। फिर भी उनका हौसला नहीं टूटा। 1976 में उन्होंने वेदांता की नींव रखी। अनिल अग्रवाल ने शुरुआत स्क्रैप मेटल ट्रेड से की, जिसने उन्हें इंडस्ट्री की बुनियादी समझ दी। 1986 में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना के साथ उन्होंने विनिर्माण की दुनिया में कदम रखा। 1993 में देश का पहला निजी कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी शुरू करना एक निर्णायक मोड़ था। इसके बाद 2001 में बाल्को (BALCO) और फिर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) के अधिग्रहण ने उनके कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इन्हीं सौदों के बाद उद्योग जगत में उन्हें ‘मेटल किंग’ कहा जाने लगा।
दुनिया भर में वेदांता का कारोबार
आज वेदांता ग्रुप जिंक, कॉपर, एल्युमिनियम, सिल्वर, पावर, आयरन, स्टील और ऑयल-गैस जैसे विविध क्षेत्रों में मौजूद है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में समूह ने भारत से बाहर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पैर जमाए हैं। आने वाले वर्षों को देखते हुए कंपनी सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले ग्लास मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-टेक सेक्टर में भी निवेश कर रही है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
Leave a comment